ममता बनर्जी की अपनी पार्टी में भूचाल — क्या TMC टूटने वाली है? BJP मंत्री तापस रॉय का बड़ा दावा

जो party कभी West Bengal की सबसे ताकतवर political force मानी जाती थी, आज उसी के अंदर से बगावत की आवाजें आ रही हैं। BJP मंत्री तापस रॉय ने एक ऐसा दावा किया है जिसने पूरी Bengal politics में हलचल मचा दी है — उनका कहना है कि TMC में वही होने वाला है जो Maharashtra में हुआ था। और अगर यह सच हुआ, तो ममता बनर्जी की राजनीतिक विरासत खतरे में पड़ सकती है।

तापस रॉय का वो बड़ा दावा जिसने सबको चौंकाया

West Bengal के BJP मंत्री तापस रॉय ने मंगलवार को एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि Trinamool Congress में Maharashtra जैसी टूट के संकेत साफ दिख रहे हैं।

रॉय का कहना है कि TMC ने पिछले कुछ सालों में ऐसे बहुत से लोगों को party में शामिल किया जिनका राजनीति से कोई खास लेना-देना नहीं था। ये वो लोग थे जो power के लिए आए थे, ideology के लिए नहीं। और अब जब party विपक्ष में आ गई है, तो इन्हीं लोगों में बेचैनी सबसे ज्यादा है।

यह बयान इसलिए भी important है क्योंकि तापस रॉय खुद TMC के senior नेता रहे हैं। उन्होंने party का अंदरूनी structure करीब से देखा है। उनका यह दावा महज political rhetoric नहीं लगता।

Maharashtra Model क्या है — जो ममता को डरा रहा है?

Maharashtra में जो हुआ वो Indian politics की सबसे बड़ी lessons में से एक है।

2022 में Uddhav Thackeray की Shiv Sena में उस वक्त टूट आई जब Eknath Shinde और उनके साथ बड़ी संख्या में MLAs ने बगावत की। MLAs का majority एक अलग camp में चला गया और नतीजा यह हुआ कि original party का नाम और चुनाव चिह्न दोनों उनसे छिन गए। Uddhav Thackeray हाथ मलते रह गए।

यही “Maharashtra Model” है — जिसमें किसी party के MLAs की majority अलग हो जाए, नई सरकार बनाने का दावा करे, और ultimately party पर ही कब्जा कर ले।

तापस रॉय का इशारा साफ है — TMC में भी यही हो सकता है।

कितने MLA बागी हो सकते हैं?

यह सबसे बड़ा सवाल है।

Sources के मुताबिक TMC का एक बागी गुट सक्रिय है। इस गुट ने विधानसभा में एकत्रित होकर 59 MLAs के समर्थन का दावा किया है। इनमें suspend किए गए TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा भी शामिल हैं।

बागी गुट की योजना है कि ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नया नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए। यह एक symbolic लेकिन बेहद powerful political move होगा — क्योंकि इससे यह संदेश जाएगा कि असली TMC वो है जिसमें ममता नहीं हैं।

TMC ने क्या action लिया?

ममता बनर्जी की party ने बगावत को seriously लेते हुए तुरंत कार्रवाई की।

ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को party विरोधी गतिविधियों के आरोप में suspend कर दिया गया। यह कदम इस बात का signal है कि TMC leadership घबराई हुई है।

लेकिन suspend करने से क्या होगा? MLA पद नहीं जाता। विधानसभा में vote देने का अधिकार नहीं जाता। और अगर इनके साथ और MLAs जुड़ते गए तो suspension एक बेकार की कार्रवाई साबित होगी।

साइन कांड’ — वो controversy जिसने आग में घी डाला

TMC की मौजूदा internal politics को समझने के लिए ‘साइन कांड’ को समझना जरूरी है।

यह विवाद एक document पर signatures को लेकर है। आरोप है कि MLAs से जबरदस्ती या धोखे से signatures लिए गए — या फिर उनकी जानकारी के बिना documents पर sign किए गए। इस controversy ने party के अंदर एक ऐसा distrust पैदा कर दिया जिसे आसानी से दूर नहीं किया जा सकता।

जब नेता अपने ही party के ऊपर भरोसा नहीं कर पाते, तो टूट का रास्ता खुल जाता है।

ममता बनर्जी की reaction — पूरी ताकत झोंक दी

ममता बनर्जी इस threat को लेकर बिल्कुल सतर्क हैं। Maharashtra में जो हुआ वो उन्होंने करीब से देखा है और वो नहीं चाहतीं कि Bengal में भी वही repeat हो।

सूत्रों के मुताबिक ममता ने अपने loyal MLAs को एकजुट रखने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। Party के अंदर एक-एक MLA से personal contact किया जा रहा है। जो नाराज हैं उन्हें मनाने की कोशिश हो रही है।

लेकिन सवाल यह है — जब किसी MLA ने power और position देखकर party join की हो, और अब party opposition में हो, तो उन्हें रोकना कितना मुश्किल है?

क्या नई TMC बनेगी?

यह सबसे बड़ा political सवाल है जो Bengal में इन दिनों हर किसी की जुबान पर है।

अगर बागी MLAs की संख्या enough threshold तक पहुंच गई — और वो electoral commission के सामने यह साबित कर पाए कि असली TMC वही है — तो theoretically party का नाम और symbol दोनों उन्हें मिल सकते हैं। यही Maharashtra में हुआ था।

ऐसे में ममता बनर्जी खुद उस party से बेदखल हो सकती हैं जो उन्होंने 1998 में Congress से अलग होकर बनाई थी।

हालांकि यह अभी सिर्फ एक possibility है। लेकिन political experts इसे dismiss नहीं कर रहे।

INDIA Alliance की बैठक — विपक्ष का अगला कदम

इस पूरे TMC घमासान के बीच एक और बड़ी खबर है।

INDIA Alliance की एक बड़ी बैठक 8 जून को scheduled है। Congress president मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में विपक्ष का अगला strategy तय होगा।

TMC के internal crisis के बीच यह बैठक इसलिए और important हो जाती है क्योंकि Bengal में विपक्ष की role अब officially TMC की होगी — और अगर TMC ही unstable हो तो opposition कितना effective होगा, यह बड़ा सवाल है।

Bottom Line — Bengal Politics में क्या होने वाला है?

West Bengal की politics अभी बेहद fluid है। BJP सत्ता में है, Suvendu Adhikari CM हैं, और TMC जो 15 साल तक सत्ता में रही वो अब opposition में बैठकर खुद को बचाने की कोशिश कर रही है।

तापस रॉय का ‘Maharashtra Model’ वाला दावा एक warning भी है और एक political prediction भी। आने वाले हफ्ते बताएंगे कि TMC की नाव डूबती है या किनारा मिलता है।

एक बात तो तय है — Bengal politics में अगले कुछ हफ्ते बेहद interesting होने वाले हैं।

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